उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hansi labon pe sajae udas rahta hai

हँसी लबों पे सजाए उदास रहता है

ہنسی لبوں پہ سجائے اداس رہتا ہے

शायर: Ejaz Rahmani9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हँसी लबों पे सजाए उदास रहता है
ये कौन है जो मिरे घर के पास रहता है

ये और बात कि मिलता नहीं कोई उस से
मगर वो शख़्स सरापा सिपास रहता है

जहाँ पे डूब गया मेरी आस का सूरज
उसी जगह वो सितारा-शनास रहता है

गुज़र रहा हूँ मैं सौदा-गरों की बस्ती से
बदन पे देखिए कब तक लिबास रहता है

लिखी है किस ने ये तहरीर रेग-ए-साहिल पर
बहुत दिनों से समुंदर उदास रहता है

मैं वहशतों के सफ़र में भी हूँ कहाँ तन्हा
यही गुमाँ है कोई आस-पास रहता है

मैं गुफ़्तुगू के हर अंदाज़ को समझता हूँ
कि मेरी ज़ात में लहजा-शनास रहता है

वो फ़ासलों में भी रखता है रंग क़ुर्बत के
नज़र से दूर सही दिल के पास रहता है

जब उन से गुफ़्तुगू करता है कोई भी 'एजाज़'
इक इल्तिमास पस-ए-इल्तिमास रहता है