उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahshaton ka aaj phir charcha raha

वहशतों का आज फिर चर्चा रहा

وحشتوں کا آج پھر چرچا رہا

शायर: Gauhar Seema7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वहशतों का आज फिर चर्चा रहा
आज फिर ये दिल मिरा ठहरा रहा

वादियों में ज़िंदगी मरती रही
दर्द आँखों से मिरे बहता रहा

पत्थरों के वार वो सहते गए
आइनों के साथ ये क़िस्सा रहा

मसअले शम्अ बुझा कर थक गए
शौक़ का सूरज मगर जलता रहा

ज़िंदगी अपना सफ़र करती गई
रू-ब-रू आँखों के इक चेहरा रहा

मुंतशिर थे धड़कनों के साज़ भी
दिल मुसलसल रात भर तन्हा रहा

ज़ख़्म दे कर थक गई ये ज़िंदगी
ख़्वाब आँखों में मगर ठहरा रहा