उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya ab kisi ki aarzu ya justuju karen

क्या अब किसी की आरज़ू या जुस्तुजू करें

کیا اب کسی کی آرزو یا جستجو کریں

शायर: Gauhar Seema5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या अब किसी की आरज़ू या जुस्तुजू करें
अब ख़ुद से ही सवाल करें गुफ़्तुगू करें

कोई तो काम ऐसा करें ज़िंदगी में हम
कुछ अपने वालदैन को भी सुर्ख़-रू करें

डालें नज़र हम अपने भी ऐबों पे दोस्तों
जब आइने को अपने कभी रू-ब-रू करें

क़ुदरत के कारनामों में है कितनी दिलकशी
लगता है बारिशों में कि पत्ते वुज़ू करें

अब ख़त्म कर दे ज़िंदगी साँसों का सिलसिला
हम अपनी ख़्वाहिशों का कहाँ तक लहू करें