उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahshat firaq KHauf tera dhyan al-aman

वहशत फ़िराक़ ख़ौफ़ तिरा ध्यान अल-अमान

وحشت فراق خوف ترا دھیان الامان

शायर: Iftikhar Haidar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वहशत फ़िराक़ ख़ौफ़ तिरा ध्यान अल-अमान
कितनी बलाएँ हैं मिरी मेहमान अल-अमान

आँखों को ख़ीरा कर गया इक जलवा-ए-शरीर
और दिल को खा गई तिरी मुस्कान अल-अमान

इक सिलसिला जुड़ा था कि फिर आँख खुल गई
किस दर्जा हो गया मिरा नुक़सान अल-अमान

ऐ हुस्न-ए-दिल-फ़रेब ज़रा देर को फ़रेब
करने लगा है हिज्र परेशान अल-अमान

ऐ इश्क़-ए-मेहरबान कोई दम कोई दरूद
मिलता नहीं कोई भी निगहबान अल-अमान

ऐसे निकलना है तिरी बज़्म-ए-जमाल से
जैसे किसी बदन से कोई जान अल-अमान