उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDhao hath baDhao faqir mauj mein hai

बढ़ाओ हाथ बढ़ाओ फ़क़ीर मौज में है

بڑھاؤ ہاتھ بڑھاؤ فقیر موج میں ہے

शायर: Iftikhar Haidar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बढ़ाओ हाथ बढ़ाओ फ़क़ीर मौज में है
तवंगरो इधर आओ फ़क़ीर मौज में है

जिसे भी चाहिए ख़ैरात-ए-नूर ले जाए
भड़क रहा है अलाव फ़क़ीर मौज में है

ख़रीद ले न तुम्हारी ये काएनात तमाम
उसे बताना न भाव फ़क़ीर मौज में है

गिरा हुआ तो नहीं है ज़मीं को थामे है
ज़मीन से न उठाओ फ़क़ीर मौज में है

बस इक तरीक़ा है उस के क़रीब जाने का
धमाल डालते जाओ फ़क़ीर मौज में है

अभी तुम उस की निगाहों से दो-जहाँ देखो
अभी सुबू न उठाओ फ़क़ीर मौज में है

ख़मोश बैठा हुआ है ख़मोश रहने दो
और अपनी ख़ैर मनाओ फ़क़ीर मौज में है