उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bosa na de gale na laga hath mat mila

बोसा न दे गले न लगा हाथ मत मिला

بوسہ نہ دے گلے نہ لگا ہاتھ مت ملا

शायर: Iftikhar Haidar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बोसा न दे गले न लगा हाथ मत मिला
ऐ यार-ए-ख़ुश-जमाल मगर सामने तो आ

दो चार गज़ के फ़ासले से मुस्कुरा के देख
दो चार गज़ के फ़ासले तक आ के लौट जा

या घर में बैठ और मुझे तस्वीर भेज दे
फ़स्ल-ए-वबा में वस्ल का अंदाज़ है जुदा

खिड़की से झाँक झाँक के ख़ुश हो ऐ रू-ए-ख़ुश
पट खोल देख देख के कुछ देर मुस्कुरा

गुज़रें वबा के दिन तो बग़ल-गीर होवेंगे
अरमान ज़ब्त कर ऐ मिरे यार थम ज़रा