उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahi nibah ke kanTe wahi gulab ke phul

वही निबाह के काँटे वही गुलाब के फूल

وہی نباہ کے کانٹے وہی گلاب کے پھول

शायर: Vijay Sharma6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वही निबाह के काँटे वही गुलाब के फूल
मेरे नसीब में कब आए मेरे ख़्वाब के फूल

सुकून-ए-ज़ब्त पे ठहरा वो दर्द का मौसम
जुनूँ के रंग में खिलते रहे अज़ाब के फूल

तिलिस्म कैसा बँधा है हवा-ए-सहरा से
महक रहे हैं मेरी ज़ात में सराब के फूल

ब-शक्ल-ए-बुत मिली सहरा में देवी पतझड़ की
ये सोचता हूँ चढ़ाऊँ उसे मैं आब के फूल

नहीं है कोई तवाज़ुन वफ़ा-ओ-हुस्न के बीच
न अब वो हिज्र न सूखे हुए किताब के फूल

महक रही है मेरे सहन की नई मिट्टी
बरस रहे हैं बड़ी देर से सहाब के फूल