उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahan har aadmi chakra gaya hai

वहाँ हर आदमी चकरा गया है

وہاں ہر آدمی چکرا گیا ہے

शायर: Ghayur Jafari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वहाँ हर आदमी चकरा गया है
जहाँ से रास्ता बल खा गया है

कोई इक पल में ग़ाएब हो चुका है
किसी को देर तक सोचा गया है

कहीं पुर-शोर आवाज़ों का जंगल
कहीं ता-दूर सन्नाटा गया है

अब इतना तो हवाओं में न फेंको
कभी पत्थर भी वापस आ गया है

है ज़िक्र अपनी ही शोरीदा-सरी का
कि आख़िर आज उसे हो क्या गया है

बरहना था मिरी आँखों में कोई
पड़ी अपनी नज़र शर्मा गया है