उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sharara sifat sard aahon mein tha

शरारा सिफ़त सर्द आहों में था

شرارہ صفت سرد آہوں میں تھا

शायर: Ghayur Jafari6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शरारा सिफ़त सर्द आहों में था
मिरा मैं मिरी अपनी बाँहों में था

हवाओं से क्या नश्र होता कि जो
सदाओं की सूरत निगाहों में था

वहाँ से उड़ा आँख में भर गया
जहाँ-गर्द मैं तेरी राहों में था

कभी सोच लेना अबस तो नहीं
मज़ा दर्द का जिन कराहों में था

तिरे थरथराते लबों के निसार
अजब ग़ुल समाअ'त-पनाहों में था

मिरे जिस्म का एक हिस्सा 'ग़यूर'
सदा ही से लिथड़ा गुनाहों में था