उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek sadaqat hai be-rag-o-be-pai

इक सदाक़त है बे-रग-ओ-बे-पय

اک صداقت ہے بے رگ و بے پے

शायर: Ghayur Jafari5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक सदाक़त है बे-रग-ओ-बे-पय
तेरी मुट्ठी में बंद है जो शय

मेरे मुँह पर गुलाल मलता है
बोलता क्यों नहीं लहू की जय

नाचता है कि लर्ज़ा-बर-अंदाम
कोई सुर-ताल है न कोई लय

हो सके तो समेट कर रख ले
मेरे साए से और इतना भय

किस लिए तेरे मेरे बीच अब तक
दोस्ती की ख़लीज हाइल है