उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wafa zindagi se nibhane laga hun

वफ़ा ज़िंदगी से निभाने लगा हूँ

وفا زندگی سے نبھانے لگا ہوں

शायर: Aadil Muzaffarpuri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वफ़ा ज़िंदगी से निभाने लगा हूँ
मैं फिर आज-कल मुस्कुराने लगा हूँ

मोहब्बत भरी इक कहानी पुरानी
सुनो न सुनो मैं सुनाने लगा हूँ

वो कैसे मिली दिल में कैसे बसी थी
मैं पर्दे सभी अब उठाने लगा हूँ

ये 'आदिल' के अश'आर हैं ताज़ा ताज़ा
जिन्हें ज़ेर-ए-लब गुनगुनाने लगा हूँ