उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham ki aaghosh mein samae hue

ग़म की आग़ोश में समाए हुए

غم کی آغوش میں سمائے ہوئے

शायर: Aadil Muzaffarpuri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म की आग़ोश में समाए हुए
हम ज़माने के हैं सताए हुए

दिल के अंदर बहुत अंधेरा है
जब से अपने हमें पराए हुए

इस ज़माने से कुछ उमीद नहीं
फिर भी उम्मीद को लगाए हुए

तेरी महफ़िल में आ गए हमदम
आज 'आदिल' हैं सर झुकाए हुए