उर्दू शायरी · ग़ज़ल

firaq aisa mayassar ho na jae

फ़िराक़ ऐसा मयस्सर हो न जाए

فراق ایسا میسر ہو نہ جائے

शायर: Aadil Muzaffarpuri4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़िराक़ ऐसा मयस्सर हो न जाए
कि जीना मेरा दूभर हो न जाए

पड़े रहने से बिस्तर पर अकेले
हमारा हाल बद-तर हो न जाए

खुलें गर आसमानों में दरीचे
फ़लक का राज़ अज़बर हो न जाए

मुझे ये फ़िक्र 'आदिल' हो गई है
कि मरने का मुझे डर हो न जाए