उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lage hai mujhe ye saza zindagi

लगे है मुझे ये सज़ा ज़िंदगी

لگے ہے مجھے یہ سزا زندگی

शायर: Aadil Muzaffarpuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लगे है मुझे ये सज़ा ज़िंदगी
है सहरा की तपती हवा ज़िंदगी

न ख़्वाहिश न कोई तमन्ना मुझे
क़दम जल्दी जल्दी बढ़ा ज़िंदगी

मैं ज़ख़्मों का पैकर हूँ टूटा हुआ
तू मुझ को न ग़म से डरा ज़िंदगी

मोहब्बत नहीं कोई अनमोल शय
न 'आशिक़ की हर इक अदा ज़िंदगी

वो मय्यत के मेरी क़रीब आए हैं
घड़ी-दो-घड़ी लौट आ ज़िंदगी

अगर मुझ से महशर में पूछेगा वो
तो कह दूँगा थी इक ख़ता ज़िंदगी

जो 'आदिल' की ग़ज़लों का 'आशिक़ मिले
तो कर दूँगा उस पे फ़िदा ज़िंदगी