उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil sawal karta hai koi mah-jabin hai kya

दिल सवाल करता है कोई महजबीं है क्या

دل سوال کرتا ہے کوئی مہ جبیں ہے کیا

शायर: Aadil Muzaffarpuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल सवाल करता है कोई महजबीं है क्या
ज़ख़्म जिस से मिलते हैं जान के क़रीं है क्या

पहले रोज़ मिलते थे अब कभी नहीं मिलते
हम से दिल-नशीं दिलकश कोई हमनशीं है क्या

'इश्क़ से मोहब्बत से तुम को ख़ौफ़ आता है
दर्द से भरी दुनिया इस क़दर हसीं है क्या

डर तो छूट जाने का हर किसी को होता है
हम बिछड़ने वाले हैं हो गया यक़ीं है क्या

क्या हुआ जो हारेंगे इन जहान वालों से
जीत जाने वालों की सिर्फ़ ये ज़मीं है क्या

तुम अना-पसंद 'आदिल' और न कीना-परवर हो
मिल गया ख़ुदा तुम को झुक गई जबीं है क्या