उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wafa ka nishan sach ka meyar hain hum

वफ़ा का निशाँ सच का मे'यार हैं हम

وفا کا نشاں سچ کا معیار ہیں ہم

शायर: Hafiz Taib9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वफ़ा का निशाँ सच का मे'यार हैं हम
मह-ए-ख़ूँ सर-ए-मतला'-ए-दार हैं हम

जो रखते हैं गर्म-ए-फ़ुग़ाँ बे-बसों को
उन्ही सर्द जज़्बों का इज़हार हैं हम

गिरफ़्तार ख़ुद जिस में हुस्न-ए-अज़ल है
उसी कर्ब के आइना-दार हैं हम

अँधेरों के जंगल में हैं पा-शिकस्ता
मगर ‘आज़िम-ए-शहर-ए-अनवार हैं हम

जो 'उन्वान-ए-तस्लीम-ओ-ता'ज़ीम ठहरे
वो किरदार-ए-तमसील-ए-पिंदार हैं हम

सर-ए-राह-ए-दिल हाथ फैलाए कब से
तिरे मुंतज़िर मिस्ल-ए-अश्जार हैं हम

हमारा मुक़द्दर है शाम-ए-ग़रीबाँ
कि सुब्ह-ए-तरब के 'अज़ादार हैं हम

दयार-ए-हक़ाएक़ को जाएँ तो कैसे
असीरान-ए-ज़िंदान-ए-अफ़्कार हैं हम

फ़ज़ा देख कर कोहर-आलूद 'ताइब'
ख़िलाफ़-ए-तबी’अत शरर-बार हैं हम