उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sauda-e-sarab de gaye hain

सौदा-ए-सराब दे गए हैं

سودائے سراب دے گئے ہیں

शायर: Hafiz Taib13 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सौदा-ए-सराब दे गए हैं
क्या कुछ हमें ख़्वाब दे गए हैं

रूहों की सपाट वुस'अतों को
हैरत के सहाब दे गए हैं

सोचों की उदास टहनियों को
ज़ख़्मों के गुलाब दे गए हैं

साँसों की ख़मोश नद्दियों को
मौजों के रुबाब दे गए हैं

जज़्बात की ख़ुश्क खेतियों को
सैलाब-ए-'अज़ाब दे गए हैं

वीरान दिलों के साहिलों को
क्या क्या दुर-ए-नाब दे गए हैं

क़रनों के उजाड़ रास्तों को
लम्हों के शहाब दे गए हैं

झीलों के दराज़ दामनों को
'अक्सों की किताब दे गए हैं

बरसों के थके मुसाफ़िरों को
'अर्सों का निसाब दे गए हैं

आहिस्ता-ख़िराम मौसमों को
शोर-ए-तब-ओ-ताब दे गए हैं

कुछ चेहरे बिखरती झुर्रियों को
अंदोह-ए-शबाब दे गए हैं

अच्छा है वो हम ज़ियाँ-कशों को
इदराक-ए-हिसाब दे गए हैं

हर आन नए सवाल 'ताइब'
आ'साब जवाब दे गए हैं