उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waqai KHatm intizar hua

वाक़'ई ख़त्म इंतिज़ार हुआ

واقعی ختم انتظار ہوا

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वाक़'ई ख़त्म इंतिज़ार हुआ
उस को छू कर ही ए'तिबार हुआ

आप तशरीफ़ लाए थे इक रोज़
दूसरे रोज़ ए'तिबार हुआ

मैं वो दरिया हूँ जिस के पानी में
कोई डूबा न कोई पार हुआ

कोई आहट नहीं हुई जब रात
तो हवा का भी इंतिज़ार हुआ

मेरे चारों तरफ़ फ़सीलें थीं
पाँचवीं सम्त से फ़रार हुआ

उस की तस्वीर उठाई फिर रख दी
रात ये काम बार बार हुआ

'उर्स था रात उस की यादों का
ख़ूब अश्कों का कारोबार हुआ