उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usi se KHush hai dil jis se KHafa hai

उसी से ख़ुश है दिल जिस से ख़फ़ा है

اسی سے خوش ہے دل جس سے خفا ہے

शायर: Zaheen Shah Taji6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उसी से ख़ुश है दिल जिस से ख़फ़ा है
न जाने ये मुझे क्या हो गया है

जफ़ा होती रही ये भी वफ़ा है
बड़ा एहसान बे-मिन्नत जफ़ा है

न फ़रमाएँ सज़ा देने की ज़हमत
मोहब्बत आप ही अपनी सज़ा है

मुझे ना-दीदा जल्वे पर गुमाँ था
ये जल्वा तो मिरा देखा हुआ है

हक़ीक़त में मिरा गिर्या ही ऐ दोस्त
तिरे लब पर तबस्सुम बन गया है

'ज़हीन' इस बंदगी से बाज़ आया
वो काफ़िर क्या कोई मेरा ख़ुदा है