उर्दू शायरी · ग़ज़ल

use ujale ka KHatra satata rahta hai

उसे उजाले का ख़तरा सताता रहता है

اسے اجالے کا خطرہ ستاتا رہتا ہے

शायर: Yasir Khan Inam5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उसे उजाले का ख़तरा सताता रहता है
पकड़ पकड़ के वो जुगनू बुझाता रहता है

दु'आएँ देता है कोई न भीक माँगे यहाँ
मगर वो चाक पे कासे बनाता रहता है

हवा पे ज़ोर तो चलता नहीं है जुगनू का
मगर चराग़ की हिम्मत बढ़ाता रहता है

वो शख़्स जिस को अभी तैरना नहीं आता
वो डूबने के फ़वाइद गिनाता रहता है

ख़मोशियों से बड़ा रब्त था जिसे 'यासिर'
वो कैनवास पे चीख़ें बनाता रहता है