उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baDe saliqe se ab hum ko jhuT bolna hai

बड़े सलीक़े से अब हम को झूट बोलना है

بڑے سلیقے سے اب ہم کو جھوٹ بولنا ہے

शायर: Yasir Khan Inam5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बड़े सलीक़े से अब हम को झूट बोलना है
मरे न कोई फ़क़त इतना ज़हर घोलना है

रखी हुई है तिरी याद दिल के पलड़े में
अब इस तराज़ू में इक इश्क़ और तोलना है

मैं इस लिए भी ज़माने में सब को प्यारा हूँ
मुझे पता है कहाँ कितना झूट बोलना है

हमारे देश में इंसाफ़ की जो देवी है
अब आस्था से उसे ज़िंदगी को तोलना है

हवा लिए हुए फिरती है क़ैंचियाँ 'यासिर'
बड़े हिसाब से अपने परों को खोलना है