उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ishq se jam se barsat se Dar lagta hai

इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है

عشق سے جام سے برسات سے ڈر لگتا ہے

शायर: Yasir Khan Inam5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इश्क़ से जाम से बरसात से डर लगता है
यार तुम क्या हो कि हर बात से डर लगता है

इश्क़ है इश्क़ कोई खेल नहीं बच्चों का
वो चला जाए जिसे मात से डर लगता है

मैं तिरे हुस्न का शैदाई नहीं हो सकता
रोज़ बटती हुई ख़ैरात से डर लगता है

हम ने हालात बदलने की दुआ माँगी थी
अब बदलते हुए हालात से डर लगता है

दिल तो करता है कि बारिश में नहाएँ 'यासिर'
घर जो कच्चा हो तो बरसात से डर लगता है