उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhon ko kuchh KHwab dikha kar manenge

आँखों को कुछ ख़्वाब दिखा कर मानेंगे

آنکھوں کو کچھ خواب دکھا کر مانیں گے

शायर: Yasir Khan Inam7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखों को कुछ ख़्वाब दिखा कर मानेंगे
आप हमारे होश उड़ा कर मानेंगे

लगता है ये पानी बेचने वाले लोग
हर बस्ती में आग लगा कर मानेंगे

तुझ को छूने की चाहत में दीवाने
शायद अपने हाथ जला कर मानेंगे

तय तो ये था पिछली बातें भूलनी हैं
आप मगर सब याद दिला कर मानेंगे

घर का झगड़ा गर बाहर आ जाएगा
बाहर वाले अंदर आ कर मानेंगे

चाहे फिर आवाज़ चली जाए लेकिन
हम उस को आवाज़ लगा कर मानेंगे

घर पक्का करने की बातें करते हैं
या'नी वो दीवार उठा कर मानेंगे