उर्दू शायरी · ग़ज़ल

duniya agar jalaegi to kya jalunga main

दुनिया अगर जलाएगी तो क्या जलूँगा मैं

دنیا اگر جلائے گی تو کیا جلوں گا میں

शायर: Yasir Khan Inam5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दुनिया अगर जलाएगी तो क्या जलूँगा मैं
हाँ तुम जला रहे हो तो अच्छा जलूँगा मैं

अश्कों की वो कमी कि बदन ख़ुश्क हो चुका
इस बार जल उठूँगा तो सारा जलूँगा मैं

तुम जल नहीं सके तो हवाएँ ही रोक लो
कब तक इन आँधियों में अकेला जलूँगा मैं

हूँ अश्क-बार मुझ को अभी मत जलाइए
होगा धुआँ ज़ियादा जो गीला जलूँगा मैं

अब ऐसे क्या बताऊँ ये अंदाज़ा है मिरा
बरसात के हिसाब से ख़ासा जलूँगा मैं