उर्दू शायरी · ग़ज़ल

use laga tha kisi aur hi gali mein hua

उसे लगा था किसी और ही गली में हुआ

اسے لگا تھا کسی اور ہی گلی میں ہوا

शायर: Ozair Yusuf8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उसे लगा था किसी और ही गली में हुआ
जो हादिसा था ख़बर में मिरी गली में हुआ

दो एक लोग नहीं थे भरी गली में हुआ
तुझे ख़बर है तमाशा तिरी गली में हुआ

हमारी बात घरों की घरों में क्यों न रही
हमारा फ़ैसला क्यूँकर किसी गली में हुआ

मिरी घड़ी तो रुकी है मुझे बताओ ज़रा
तुलू’-ए-सुब्ह यहाँ कौन सी गली में हुआ

फिर एक शख़्स खड़ा देखता था हर घर को
कि घर का दुख था उसे और दुखी गली में हुआ

'अजीब क़त्ल था आवाज़ तक न आई कोई
न कोई शोर शराबा किसी गली में हुआ

तुम्हारा मुझ से बिछड़ने का तज़्किरा हर पल
बराए बहस हुआ और गली गली में हुआ

जहाँ से रास्ते अपने जुदा हुए थे 'उज़ैर'
हमारा सामना फिर से उसी गली में हुआ