उर्दू शायरी · ग़ज़ल

makin ke hote hue rabta makan se hua

मकीं के होते हुए राब्ता मकाँ से हुआ

مکیں کے ہوتے ہوئے رابطہ مکاں سے ہوا

शायर: Ozair Yusuf5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मकीं के होते हुए राब्ता मकाँ से हुआ
मुकालिमा जो हुआ भी तो बे-ज़बाँ से हुआ

मैं उस की सम्त जो निकला तो कुछ नहीं था वहाँ
वहीं खड़ा था इशारा मुझे जहाँ से हुआ

तुम्हारे बा'द बदन में तलाश करता हूँ
मैं अपने आप में ख़ाली कहाँ कहाँ से हुआ

मैं अपने क़ा’एदे क़ानून ले के आया हूँ
वो निस्फ़ निस्फ़ नहीं जो भी दरमियाँ से हुआ

तलाश करते फिरे हम-सफ़र 'उज़ैर' मुझे
कुछ इस तरह मैं जुदा गर्द-ए-कारवाँ से हुआ