उर्दू शायरी · ग़ज़ल

meri nazar ka sharar apna kaam karne laga

मिरी नज़र का शरर अपना काम करने लगा

مری نظر کا شرر اپنا کام کرنے لگا

शायर: Ozair Yusuf6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरी नज़र का शरर अपना काम करने लगा
बुझा चराग़ मिरे देखने से जलने लगा

ज़रा सी रौशनी उट्ठी थी मेरे पहलू से
फिर एक साया मिरे साथ साथ चलने लगा

ये जिस तरह से दिखाता है ख़ाल-ओ-ख़द मेरे
मिरा वुजूद तिरे आइने से डरने लगा

वही निशाँ जो मुझे खींचता था अपनी तरफ़
मैं चल पड़ा तो वो अपनी जगह बदलने लगा

अज़ल अबद के किनारों में खींचा-तानी हुई
रिदा-ए-वक़्त पे जब मेरा हाथ पड़ने लगा

'उज़ैर' छोड़ के मेरी घड़ी कलाई पर
मिरा ये वक़्त मिरे हाथ से फिसलने लगा