उर्दू शायरी · ग़ज़ल

use har Khaar-o-gul pyara lage hai

उसे हर ख़ार-ओ-गुल प्यारा लगे है

اسے ہر خار و گل پیارا لگے ہے

शायर: Kaleem Aajiz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उसे हर ख़ार-ओ-गुल प्यारा लगे है
ये दिल कम्बख़्त आवारा लगे है

सुख़न 'आजिज़' का क्यों प्यारा लगे है
ये कोई दर्द का मारा लगे है

खिलाए हैं वो गुल ज़ख़्मों ने उस के
हसीं जिन से चमन सारा लगे है

लगे है फूल सुनने में हर इक शे'र
समझ लेने पे अंगारा लगे है

ये है लूटा हुआ इस संग-दिल का
जो देखे में बहुत प्यारा लगे है

तुम आख़िर बद-गुमाँ 'आजिज़' से क्यों हो
वो बेचारा तो बेचारा लगे है