उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usne kya kya nahin diya mujhko

उस ने क्या क्या नहीं दिया मुझ को

اس نے کیا کیا نہیں دیا مجھ کو

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस ने क्या क्या नहीं दिया मुझ को
चैन फिर भी नहीं मिला मुझ को

कल शब-ए-हिज्र शर्मसार हुई
तू नहीं है नहीं लगा मुझ को

अब किताबों से कुछ नहीं होगा
मार डालेगा तज्रबा मुझ को

सोचता हूँ कि अब कहाँ जाऊँ
तू भी पागल न कर सका मुझ को

मुझ से आगे नहीं निकल सकता
वो नहीं देगा रास्ता मुझ को

मैं जो बढ़ता हूँ सर-वरक़ की तरफ़
खींच लेता है हाशिया मुझ को

मैं छुपा रहता ज़िंदगी में और
तू कहीं और ढूँडता मुझ को

मैं वही शोर लिखता रहता हूँ
जिस ने ख़ामोश कर दिया मुझ को