उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usne dekha idhar ziyaada der

उस ने देखा इधर ज़ियादा देर

اس نے دیکھا ادھر زیادہ دیر

शायर: Badr Muneer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस ने देखा इधर ज़ियादा देर
क्यों न रहता असर ज़ियादा देर

सारी दुनिया थी गोश-बर-आवाज़
कैसे छुपती ख़बर ज़ियादा देर

दिल पे देता रहा कोई दस्तक
हम ने कर दी मगर ज़ियादा देर

सिर्फ़ इख़्लास हो तो चलता है
दोस्ती का सफ़र ज़ियादा देर

जिस्म बे-जान हो तो फिर कैसे
साथ दें बाल-ओ-पर ज़ियादा देर

उस के चेहरे की ताबनाकी पर
कैसे रुकती नज़र ज़ियादा देर