उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usko ek bar raushni mein dekh

उस को इक बार रौशनी में देख

اس کو اک بار روشنی میں دیکھ

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस को इक बार रौशनी में देख
और ता-'उम्र तीरगी में देख

क्या नहीं होता मुफ़्लिसी में देख
मीर-ओ-ग़ालिब की शा'इरी में देख

दिलरुबा है ये कोशिश-ए-नाकाम
उस के चेहरे को फिर किसी में देख

उस का हम-शक्ल कोई है ही नहीं
उस का अंदाज़ बस उसी में देख

कोई कोना अमीर हो शायद
ग़ौर से सहन-ए-मुफ़्लिसी में देख

तेरे कूचे की ख़ाक का सिक्का
चल रहा है मिरी गली में देख

उस की महफ़िल सजी हुई है अभी
वक़्त ठहरी हुई घड़ी में देख