उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uski khiDki se raushni aai

उस की खिड़की से रौशनी आई

اس کی کھڑکی سے روشنی آئی

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस की खिड़की से रौशनी आई
शह्र में फिर से ज़िंदगी आई

जब ख़यालात हो गए बूढ़े
तब मोहब्बत पे कम-सिनी आई

वो न बोला तो आज कानों में
जो सदा आई अजनबी आई

बाक़ी सब शह्र हो गया ग़ाएब
सामने जब तिरी गली आई

मुझ को आया न हाथ फैलाना
मेरे हिस्से में शा'इरी आई

इस लिए भी कराहता हूँ मैं
कोई आवाज़ दे अभी आई

गर हवा आई भी शब-ए-फ़ुर्क़त
तो चराग़ों को ढूँढती आई