उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uske mear par utarte hue

उस के मेआ'र पर उतरते हुए

اس کے معیار پر اترتے ہوئے

शायर: Osama Jamil5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस के मेआ'र पर उतरते हुए
लोग देखे कई बिगड़ते हुए

आदमी राख हो गया इक दिन
धूप को छाँव में बदलते हुए

पहले तो जिस्म से हुआ वाक़िफ़
वो मिरी रूह में उतरते हुए

आइनों से मिरी नहीं बनती
देखते हैं उसे सँवरते हुए

ये तमन्ना ही रह गई ख़ुद को
देखना चाहता हूँ मरते हुए