उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mujhse bhi ishq ka sila had hai

मुझ से भी इश्क़ का सिला हद है

مجھ سے بھی عشق کا صلہ حد ہے

शायर: Osama Jamil5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुझ से भी इश्क़ का सिला हद है
और कोई नहीं मिला हद है

इक मोहब्बत में आफ़तें दो हैं
और ये तीसरी बला हद है

सब से बेज़ार था मगर दिल को
तू भी अच्छा नहीं लगा हद है

लम्स इक आग है तपिश है बस
ऐसे माहौल में हुआ हद है

जब ख़ुदा को नहीं मिला कुछ भी
मेरी दुनिया में आ गया हद है