उर्दू शायरी · ग़ज़ल

log jis ko KHuda samajhte hain

लोग जिस को ख़ुदा समझते हैं

لوگ جس کو خدا سمجھتے ہیں

शायर: Osama Jamil6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लोग जिस को ख़ुदा समझते हैं
हम उसे इर्तिक़ा समझते हैं

मैं तो चश्मे को पानी कहता हूँ
लोग तो मो'जिज़ा समझते है

मैं समझता हूँ ये जहन्नुम है
आप दुनिया को क्या समझते हैं

कोई कहते हैं मौत को सदमा
कोई रब की रज़ा समझते हैं

आप करते हैं बात मतलब की
यानी अच्छा बुरा समझते हैं

मार डाले न आप को कोई
ख़ुद को सब से जुदा समझते हैं