उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uske jaisa koi mila hi nahin

उस के जैसा कोई मिला ही नहीं

اس کے جیسا کوئی ملا ہی نہیں

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस के जैसा कोई मिला ही नहीं
कैसे मिलता कहीं पे था ही नहीं

घर के मलबे से घर बना ही नहीं
ज़लज़ले का असर गया ही नहीं

वो जहाँ तक दिखाई देता है
उस के आगे मैं देखता ही नहीं

अच्छे-अच्छों ने रास्ता माँगा
मैं तिरी राह से हटा ही नहीं

सारे किरदार हो गए ख़ुद्दार
फिर कहानी में कुछ हुआ ही नहीं

याद है जो उसी को याद करो
हिज्र की दूसरी दवा ही नहीं

तेरे बारे में सोचने वाला
अपने बारे में सोचता ही नहीं