उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uske hathon mein wo tasir-e-masihai thi

उस के हाथों में वो तासीर-ए-मसीहाई थी

اس کے ہاتھوں میں وہ تاثیر مسیحائی تھی

शायर: Yasir Khan Inam5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस के हाथों में वो तासीर-ए-मसीहाई थी
सूखते पेड़ से भी शाख़ निकल आई थी

ज़िंदगी भर वो उदासी के लिए काफ़ी है
एक तस्वीर जो हँसते हुए खिंचवाई थी

कल तो मरने में सुहूलत भी बहुत थी मुझ को
हिज्र था रात थी बरसात थी तन्हाई थी

मर गया प्यास से वो शख़्स भी अब हैरत है
जिस की दरियाओं से बरसों की शनासाई थी

देख लेने की सुहूलत तो सभी को थी मगर
चंद ही आँखें थीं जिन आँखों में बीनाई थी