उर्दू शायरी · ग़ज़ल

unki yaad aae to kuchh is ka taqaza hoga

उन की याद आए तो कुछ इस का तक़ाज़ा होगा

ان کی یاد آئے تو کچھ اس کا تقاضا ہوگا

शायर: Zaheen Shah Taji6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उन की याद आए तो कुछ इस का तक़ाज़ा होगा
सोचता हूँ वो रहे याद तो फिर क्या होगा

चैन था उस की हुज़ूरी में न दूरी में सुकूँ
'उम्र भर उस की मोहब्बत में तड़पना होगा

जिस ने देखा तुझे ऐ दोस्त खुली आँखों से
वो समझता है कभी ख़्वाब में देखा होगा

खुल गया राज़ अगर हुस्न की यकताई का
हम बुरा जिस को समझते हैं वो अच्छा होगा

ख़ल्वत-आरा है भरी बज़्म में वो पैकर-ए-नाज़
अपनी ख़ल्वत में न क्यों अंजुमन-आरा होगा

'आलम-ए-होश हो या जल्वा-गह-ए-जाँ हो 'ज़हीन'
मैं ख़ुद आया नहीं कोई मुझे लाया होगा