उर्दू शायरी · ग़ज़ल

un ke naqsh-e-qadam mahakte hain

उन के नक़्श-ए-क़दम महकते हैं

ان کے نقش قدم مہکتے ہیں

शायर: Vikas Naseeb4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उन के नक़्श-ए-क़दम महकते हैं
फूल भी जिन से कम महकते हैं

नाम लिखता हूँ ख़त में जब उन का
मेरे काग़ज़ क़लम महकते हैं

जब भी रोता हूँ उन की यादों में
तो मिरे चश्म-ए-नम महकते हैं

उन की ख़ुशबू भरी है साँसों में
हम तो अब दम-ब-दम महकते हैं