उर्दू शायरी · ग़ज़ल

umuman hum akele baiThte hain

उमूमन हम अकेले बैठते हैं

عموماً ہم اکیلے بیٹھتے ہیں

शायर: Charagh Sharma6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उमूमन हम अकेले बैठते हैं
वो बैठा है तो चलिए बैठते हैं

मिरी आँखों में गुंजाइश तो कम है
पर उस के ख़्वाब पूरे बैठते हैं

उठीं नज़रें तो नज़रों से गिरेंगे
यहाँ नज़रों पे पहरे बैठते हैं

अदब का फ़र्श है ये इस पे बच्चे
बुज़ुर्गों के सहारे बैठते हैं

वो ख़ुद मरकज़ में थोड़ी बैठता है
सब उस के आगे पीछे बैठते हैं

उदासी से भरोसा उठ रहा है
चलो 'नासिर' को पढ़ने बैठते हैं