उर्दू शायरी · ग़ज़ल

umr guzri hai usi ke samne

'उम्र गुज़री है उसी के सामने

عمر گزری ہے اسی کے سامنے

शायर: Yasir Malik4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'उम्र गुज़री है उसी के सामने
जी लिया है ज़िंदगी के सामने

कर रही हैं राह ख़ाली मुश्किलें
आदमी है आदमी के सामने

हार कर ख़ुद से गिरा है जो अभी
उठ खड़ा होगा सभी के सामने

क्यों न हों अब शे'र ये बाग़ी मिरे
है हक़ीक़त शा'इरी के सामने