उर्दू शायरी · ग़ज़ल

raat jab bhi udas hoti hai

रात जब भी उदास होती है

رات جب بھی اداس ہوتی ہے

शायर: Yasir Malik5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रात जब भी उदास होती है
वो मिरे आस-पास होती है

जिस के मिलने से कुछ नहीं मिलता
उस को पाने की आस होती है

तीरगी ज़ब्त आज़माती है
रौशनी ग़म-शनास होती है

अब उसे हो सितम से क्यों परहेज़
'आशिक़ी बद-हवास होती है

ख़्वाब में जब भी तुम से मिलता हूँ
नींद में इक मिठास होती है