उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chehre apne gham ke ye tufan badalte rahte hain

चेहरे अपने ग़म के ये तूफ़ान बदलते रहते हैं

چہرے اپنے غم کے یہ طوفان بدلتے رہتے ہیں

शायर: Yasir Malik5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चेहरे अपने ग़म के ये तूफ़ान बदलते रहते हैं
और हमारी ख़ुशियों के 'उन्वान बदलते रहते हैं

आज़ादी की ख़्वाहिश भी इक क़ैद के जैसी होती है
जुर्म वही होता है बस ज़िंदान बदलते रहते हैं

कुछ शा'इर के शे'र किसी दूजे शा'इर से होते हैं
कुछ ग़म ऐसे हैं जो बस पहचान बदलते रहते हैं

कुछ ख़्वाबों को देख के लगता है पहले भी देखा है
कुछ मुर्दे बस अपना क़ब्रिस्तान बदलते रहते हैं

रोज़ नया मिल जाता है कुछ किसी किताब के पन्ने पर
शौक़ बदलता रहता है दीवान बदलते रहते हैं