उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghazal jab daman-e-sayyaad hogi

ग़ज़ल जब दामन-ए-सय्याद होगी

غزل جب دامن صیاد ہوگی

शायर: Yasir Malik5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ज़ल जब दामन-ए-सय्याद होगी
ख़याल-ए-‘इश्क़ से आज़ाद होगी

मैं यूँही शे'र बस पढ़ता रहूँगा
तिरे होंटों पे जब तक दाद होगी

कई जुगनू निकल आएँगे फिर से
नई इक रौशनी ईजाद होगी

मिरे बाज़ू ये मज़लूमों के होंगे
मिरे शानों पे तेरी याद होगी

है टूटी छत की जो इक ईंट बाक़ी
नए कल की वही बुनियाद होगी