उर्दू शायरी · ग़ज़ल

umr bhar puja hai maine jis ko wo dar hai yahi

'उम्र भर पूजा है मैं ने जिस को वो दर है यही

عمر بھر پوجا ہے میں نے جس کو وہ در ہے یہی

शायर: Zaheen Shah Taji5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'उम्र भर पूजा है मैं ने जिस को वो दर है यही
बुत-कदा मेरा यही अल्लाह का घर है यही

झुक गया दिल रूह ने सज्दा किया बे-इख़्तियार
जल्वा-गाह-ए-दिल-नवाज़-ओ-रूह-परवर है यही

कट गईं होश-ओ-ख़िरद की बेड़ियाँ आ कर यहाँ
मर्कज़-ए-जज़्ब-ओ-जुनूँ अल्लाहु-अकबर है यही

ज़र्रे ज़र्रे से यहाँ के आ रही है बू-ए-दोस्त
छोड़ कर घर हम जहाँ आए हैं वो घर है यही

जगमगा उट्ठे हैं शर्क़-ओ-ग़र्ब जिस के नूर से
मेहर-ए-'आलम-ताब माह-ए-नूर-गुस्तर है यही