उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ujDe hue jahan bahut waqt ho gaya

उजड़े हुए जहान बहुत वक़्त हो गया

اجڑے ہوئے جہان بہت وقت ہو گیا

शायर: Dakhlan Bhopali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उजड़े हुए जहान बहुत वक़्त हो गया
ज़िंदा है बस थकान बहुत वक़्त हो गया

इक क़ौल था कि साथ जिएँगे मरेंगे हम
बदले हुए बयान बहुत वक़्त हो गया

सुन फ़स्ल इश्क़ की मिरी बर्बाद हो गई
कब तक भरूँ लगान बहुत वक़्त हो गया

हम ख़ानदानी लोग अना से भरे हुए
बिखरा है ख़ानदान बहुत वक़्त हो गया

ख़ाना-ब-दोश रूह तो खंडर में क़ैद है
टूटे हुए मकान बहुत वक़्त हो गया

हम से लिपट के रोने को ही आओ एक दिन
रोए हुए भी जान बहुत वक़्त हो गया

जन्नत का आदमी हूँ ज़मीं पे उदास हूँ
कुछ सोच आसमान बहुत वक़्त हो गया