उर्दू शायरी · ग़ज़ल

faiz samjhe the jise tha wo ziyan hairat hai

फ़ैज़ समझे थे जिसे था वो ज़ियाँ हैरत है

فیض سمجھے تھے جسے تھا وہ زیاں حیرت ہے

शायर: Dakhlan Bhopali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़ैज़ समझे थे जिसे था वो ज़ियाँ हैरत है
ये मोहब्बत ही मिरे दिल को गराँ हैरत है

गुज़रे लम्हात का आँखों में पिघलना हैरत
उफ़ तिरी याद की ये तर्ज़ बयाँ हैरत है

एक राजा ने उतारी थी ज़मीं पर गंगा
इक नदी दुख में है आँखों से रवाँ हैरत है

हम जिसे दुनिया समझ बैठे थे इक मुद्दत से
शख़्स निकला वो फ़क़त एक गुमाँ हैरत है

एक लड़की जो मेरे हाफ़िज़े से ग़ाएब थी
आज फिर सीने में है रक़्स कुनाँ हैरत है