उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghazal kahen to wahi dastan niklegi

ग़ज़ल कहें तो वही दास्तान निकलेगी

غزل کہیں تو وہی داستان نکلے گی

शायर: Dakhlan Bhopali7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़ज़ल कहें तो वही दास्तान निकलेगी
हर एक शे'र में आह-ओ-फ़ुग़ाँ निकलेगी

सफ़र की मुश्किलें रोने का फ़ाएदा क्या है
कि जाते जाते ही मेरी थकान निकलेगी

जबीं के नीचे दो कश्ती में बाँध ली है नदी
ज़रूर लेगी ये इक दिन उफान निकलेगी

ये सारे तंज़ ये ता'ने ये रिश्ते नाते सब
कहाँ छुपेंगे जो मेरी ज़बान निकलेगी

वो जिस ने ख़ुद पे रिवायत का रख लिया है क़फ़स
वो एक लड़की मेरा आसमान निकलेगी

मैं चंद लम्हे अगर ज़ीस्त से हटा दूँ तो
ये मेरी ज़िंदगी बस ख़ाक-दान निकलेगी

ये ज़ब्त सब्र तबस्सुम हुए हैं चाक सभी
मैं सख़्त जान हूँ लेकिन ये जान निकलेगी