उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rashk is baat pe mar jata hai

रश्क इस बात पे मर जाता है

رشک اس بات پہ مر جاتا ہے

शायर: Dakhlan Bhopali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रश्क इस बात पे मर जाता है
कम-से-कम मिलने तो वो आता है

जाने किस तौर झेलेगा मुझ को
जी तो इस बात से घबराता है

चश्म के क़ुफ़्ल खुले रहने लगे
ख़्वाब भी आने में शरमाता है

चाशनी चाशनी लहजा जिस का
आज-कल तल्ख़ियाँ फ़रमाता है

हिज्र से आस तो है बरकत की
'इश्क़ आता है चला जाता है