उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamari ruh ko chhukar guzar gaya hai abhi

हमारी रूह को छूकर गुज़र गया है अभी

ہماری روح کو چھوکر گزر گیا ہے ابھی

शायर: Dakhlan Bhopali5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमारी रूह को छूकर गुज़र गया है अभी
वो एक लम्हा न जाने किधर गया है अभी

कि दौर-ए-इश्क़ में उस का भी एक जिस्म तो था
मुझे है शक वो फ़ज़ा में बिखर गया है अभी

ख़ज़ाने ढूँढता है वो अगर तो ले जाए
हमारी आँख से ज़ाएअ' गुहर गया है अभी

जबीं पे लहरें थीं भीतर बदन में तूफ़ाँ था
ख़ुदा का शुक्र है दरिया उतर गया है अभी

तमाम उम्र दिए मैं ने वक़्त को ता'ने
अभी सुकून है थोड़ा सुधर गया है अभी